ऊंट को रेगिस्तान का जहाज़ क्यू कहा जाता है
अगर आपसे कोई पूछे रेगिस्तान का जहाज़ किसे कहा जाता है तो शायद आपका जवाब ऊंट ही हो ,लेकिन ऊंट को रेगिस्तान का जहाज़ कहते क्यू है , ऐसा क्या है जो इसे बाकी जानवरो से अलग बनाता है तो दोस्तो यह जानने के लिए आपको इस लेख को अंत तक पढ़ना होगा तो बिना किसी देरी के शुरु करते है आज के इस लेख को ।
बात जब रेगिस्तान की हो तो रेगिस्तान मैं सबसे बड़ी कमी खाने और पानी की होती है हर किसी के लिए यहां गुजारा करना मुस्कील होता हैं लेकिन ऊंट ऐसे मुस्किल हालातो मैं भी रेगिस्तान की तपती धूप मैं यात्रा कर पाता है कुल मिलाकर ऊंट रेगिस्तान मैं रहने के लिए अनुकूल है ।
ऊंट को जो चीज बाकी जानवरो से अलग बनाती है वह है इसका खाने और पानी को इकट्ठा करके रख पाना इनकी पीठ पर एक कुबड़ होती है अब भला ये कुबड़ क्या होती है आपके मन मैं भी ये सवाल आया होगा
दोस्तो ऊंट की पीठ पर एक कुबड़ होती है इसी कुबड़ मैं ये अपनी चर्बी जमा करते है जब इन्हे खाना नही मिलता तब इसी चर्बी से इन्हे ताकत मिलती है ।
यही नहीं ये एक बार मैं बहुत सारा पानी भी पी लेते है इसी वजह से ये रेगिस्तान मैं इतने दिनो तक जिंदा रह पाते है ।
अब बात करते है ऊंट के पैरो की आपने ऊंट के पैर तो देखे ही होंगे आप क्या पाते है जी हां ऊंट के पैर गद्देदार होते है गदेदार इसलिए क्योंकि रेगिस्तान मैं जहा कही भी देखो रेत ही रेत होती है और गदेदार पैरो की मदद से ये रेगिस्तान मैं रेत पर बड़ी आसानी से चलते है और न ही इनके पैर रेत मैं धसते है ।
रेगिस्तान मैं रेत की कमी तो रहती ही है साथ ही साथ याह सिर्फ कांटे वाली झाड़ियां देखने को मिलती है ऊंट इन्ही झाड़ियों को बड़ी आराम से खाता है और इससे ऊंट का मुंह घायल भी नही होता वही अगर कोई दूसरा जानवर ऊंट की तरह कांटेदार झाड़ी खाने की कोशिश करे तो शायद उसका मुंह लहूलुहान हो जाए।
तो देखा आपने दोस्तो एक साधारण से दिखने वाले ऊंट मैं भी कितनी खूबियां है अगर आपको हमारा यह लेख पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तो को भी शेयर करे ।

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